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Daqiiq Jabaali
haal meraa poochte to ho nahin tum
haal meraa poochte to ho nahin tum | हाल मेरा पूछते तो हो नहीं तुम
- Daqiiq Jabaali
हाल
मेरा
पूछते
तो
हो
नहीं
तुम
ख़ुद
को
मेरा
दोस्त
कहते
फिर
रहे
हो
- Daqiiq Jabaali
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उस
ने
सारी
दुनिया
माँगी
मैंने
उस
को
माँगा
है
उस
के
सपने
एक
तरफ़
हैं
मेरा
सपना
एक
तरफ़
Varun Anand
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आए
थे
हँसते
खेलते
मय-ख़ाने
में
'फ़िराक़'
जब
पी
चुके
शराब
तो
संजीदा
हो
गए
Firaq Gorakhpuri
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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तमाम
फ़र्क़
मोहब्बत
में
एक
बात
के
हैं
वो
अपनी
ज़ात
का
नईं
है
हम
उस
की
ज़ात
के
हैं
Pallav Mishra
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मैं
सात
साल
से
अब
तक
हिसार-ए-इश्क़
में
हूँ
वो
शख़्स
आज
भी
मेरे
दिल-ओ-दिमाग़
में
है
Amaan Haider
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दूर
तक
छाए
थे
बादल
और
कहीं
साया
न
था
इस
तरह
बरसात
का
मौसम
कभी
आया
न
था
Qateel Shifai
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सितारे
और
क़िस्मत
देख
कर
घर
से
निकलते
हैं
जो
बुज़दिल
हैं
मुहूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
हमें
लेकिन
सफ़र
की
मुश्किलों
से
डर
नहीं
लगता
कि
हम
बच्चों
की
सूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
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Abrar Kashif
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माँ-बाबा
का
सोच
के
हर
दम
रुक
जाता
हूँ
वरना
तो
इतने
ग़म
में
मैंने
पंखे
से
टंग
कर
मर
जाना
था
Shashwat Singh Darpan
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अगर
मैं
कथा
का
क़लमकार
होता
यक़ीनन
ही
वो
तो
मिरा
यार
होता
लगाती
नहीं
हर
दफ़ा
वो
बहाने
लगा
लेती
सीने
से
गर
प्यार
होता
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Vijay Potter Singhadiya
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इश्क़
हुआ
है
क्या
तुझ
को
भी
तेरा
जो
होगा
सो
होगा
shaan manral
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इस
दुनिया
में
जीने
के
ख़ातिर
पूरा
पागल
बनना
पड़ता
है
Daqiiq Jabaali
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तुम
को
दीवाना
बना
देंगी
मियाँ
ये
मेरी
ग़ज़लें
एक
बस
उसके
लिए
लिख
डाली
इतनी
सारी
ग़ज़लें
बस
यही
नुक्सान
मेरा
है
हुआ
उस
से
बिछड़
कर
यार
अब
मैं
लिख
नहीं
पाता
हूँ
प्यारी-प्यारी
ग़ज़लें
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Daqiiq Jabaali
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कोई
हादसा
बनकर
मैं
गुज़र
ही
जाऊँगा
या
बिखर
ही
जाऊँगा
या
निखर
ही
जाऊँगा
बात-बात
पर
खाती
हो
क़सम
जो
तुम
मेरी
जानाँ
देख
लेना
इक
दिन
मैं
मर
ही
जाऊँगा
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Daqiiq Jabaali
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कोई
मेरे
जैसा
यहाँ
पागल
नहीं
प्यारे
बस
एक
तू
ही
इश्क़
में
घाइल
नहीं
प्यारे
मैं
ने
हज़ारो
बार
इक
ही
बात
बोली
है
ग़ुस्सा
किसी
भी
मस'अले
का
हल
नहीं
प्यारे
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Daqiiq Jabaali
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फूल
हूँ
ख़ार
बनाने
पे
तुली
है
दुनिया
मुझको
बेकार
बनाने
पे
तुली
है
दुनिया
Daqiiq Jabaali
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