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Daqiiq Jabaali
tum ko deewaana banaa denge miyaan ye meri ghazlen
tum ko deewaana banaa denge miyaan ye meri ghazlen | तुम को दीवाना बना देंगी मियाँ ये मेरी ग़ज़लें
- Daqiiq Jabaali
तुम
को
दीवाना
बना
देंगी
मियाँ
ये
मेरी
ग़ज़लें
एक
बस
उसके
लिए
लिख
डाली
इतनी
सारी
ग़ज़लें
बस
यही
नुक्सान
मेरा
है
हुआ
उस
से
बिछड़
कर
यार
अब
मैं
लिख
नहीं
पाता
हूँ
प्यारी-प्यारी
ग़ज़लें
- Daqiiq Jabaali
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जो
दोस्त
हैं
वो
माँगते
हैं
सुलह
की
दु'आ
दुश्मन
ये
चाहते
हैं
कि
आपस
में
जंग
हो
Lala Madhav Ram Jauhar
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दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
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Akhtar Shumar
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भले
ही
प्यार
हो
या
हिज्र
हो
या
फिर
सियासत
हो
कुछ
ऐसे
दोस्त
थे
हर
बात
पर
अश'आर
कहते
थे
Siddharth Saaz
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कहाँ
की
दोस्ती
किन
दोस्तों
की
बात
करते
हो
मियाँ
दुश्मन
नहीं
मिलता
कोई
अब
तो
ठिकाने
का
Waseem Barelvi
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जो
सावन
होते
सूखा,
उस
फूल
पे
लानत
हो
मुझ
पे
लानत,
तेरे
होते,
यार
उदासी
है
Siddharth Saaz
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अपनी
बाँहो
से
क्यूँँ
हटाऊँ
उसे
सो
रहा
है
तो
क्यूँँ
जगाऊँ
उसे
जो
भी
मिलता
है
उसका
पूछता
है
यार
किस
किस
से
मैं
छुपाऊँ
उसे
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Kafeel Rana
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अब
उस
सेे
दोस्ती
है
जिस
सेे
कल
मुहब्बत
थी
अब
इस
सेे
ज़्यादा
बुरा
वक़्त
कुछ
नहीं
है
दोस्त
Vishal Singh Tabish
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कोई
दिक़्क़त
नहीं
है
गर
तुम्हें
उलझा
सा
लगता
हूँ
मैं
पहली
मर्तबा
मिलने
में
सबको
ऐसा
लगता
हूँ
ज़रूरी
तो
नहीं
हम
साथ
हैं
तो
कोई
चक्कर
हो
वो
मेरी
दोस्त
है
और
मैं
उसे
बस
अच्छा
लगता
हूँ
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Ali Zaryoun
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कुछ
तो
कर
आदाब-ए-महफ़िल
का
लिहाज़
यार
ये
पहलू
बदलना
छोड़
दे
Waseem Barelvi
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बादलों
में
से
छनता
हुआ
नूर
देख
ऐसी
रौशन
जबीं
है
मेरे
यार
की
Afzal Ali Afzal
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मैं
बहुत
कम
बोलता
हूँ
और
ज़्यादा
सोचता
हूँ
इसको
आदत
कह
लो
मेरी
चाहे
ताक़त
कह
लो
मेरी
Daqiiq Jabaali
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वो
तो
कली
से
बन
गई
है
अब
'अमित'
गुलाब
अब
तितलियाँ
भी
बैठती
हैं
उसके
गाल
में
Daqiiq Jabaali
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जान
भी
तो
जा
सकती
है
मेरी
इस
लिए
भूलता
नहीं
तुम
को
Daqiiq Jabaali
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जब
कभी
ग़म
ने
सताया
देर
तक
मैंने
फिर
ग़ज़लों
को
गाया
देर
तक
यार
से
अपने
मैं
जब
जब
भी
मिला
सीने
से
उस
को
लगाया
देर
तक
हार
कर
भी
जब
मैं
यारों
हँस
पड़ा
दुश्मनों
ने
ग़म
मनाया
देर
तक
खौफ़
से
दुनिया
के
मैं
जब
भी
डरा
हौसला
माँ
ने
बढ़ाया
देर
तक
झूठ
कितना
भी
कहा
उसने
मगर
सच
तो
लेकिन
छुप
न
पाया
देर
तक
हाथ
ख़ुशियों
ने
कभी
पकड़ा
नहीं
साथ
तो
ग़म
ने
निभाया
देर
तक
माफ़
तुझको
मैं
भला
कैसे
करुँ
तूँ
ने
भी
तो
दिल
दुखाया
देर
तक
शा'इरी
ने
जिस
किसी
को
भी
चुना
नौकरी
वो
कर
न
पाया
देर
तक
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Daqiiq Jabaali
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जहाँ
पर
रहता
हूँ
उस
को
मेरी
पहचान
कहते
हैं
हाँ,वीरों
की
इसी
धरती
को
हिन्दुस्तान
कहते
हैं
Daqiiq Jabaali
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