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Daqiiq Jabaali
bas aur shaayaron kii tarah ishq mat likho
bas aur shaayaron kii tarah ishq mat likho | बस और शायरों की तरह इश्क़ मत लिखो
- Daqiiq Jabaali
बस
और
शायरों
की
तरह
इश्क़
मत
लिखो
अपनी
क़लम
से
प्यारे
हक़ीक़त
बयान
कर
- Daqiiq Jabaali
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सोच
कर
पाँव
डालना
इस
में
इश्क़
दरिया
नहीं
है
दलदल
है
Renu Nayyar
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इश्क़
माशूक़
इश्क़
'आशिक़
है
यानी
अपना
ही
मुब्तला
है
इश्क़
Meer Taqi Meer
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सुने
हैं
मोहब्बत
के
चर्चे
बहुत
सुना
है
कि
हैं
इस
में
ख़र्चे
बहुत
नतीजे
मोहब्बत
के
आए
नहीं
भरे
थे
मगर
हम
ने
पर्चे
बहुत
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S M Afzal Imam
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नींद
के
दायरे
में
हाज़िर
हूँ
ख़्वाब
के
रास्ते
में
हाज़िर
हूँ
याद
है
इश्क़
था
कभी
मुझ
सेे
मैं
उसी
सिलसिले
में
हाज़िर
हूँ
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Ejaz Tawakkal Khan
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मेरी
तन्हाई
देखेंगे
तो
हैरत
ही
करेंगे
लोग
मोहब्बत
छोड़
देंगे
या
मोहब्बत
ही
करेंगे
लोग
Ismail Raaz
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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अगर
बेदाग़
होता
चाँद
तो
अच्छा
नहीं
लगता
मोहब्बत
ख़ूब-सूरत
दाग़
है,
बेदाग़
से
दिल
पर
Umesh Maurya
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मिलता
नहीं
जहाँ
में
कोई
काम
ढंग
का
इक
इश्क़
था
सो
वो
भी
कई
बार
कर
चुके
Nomaan Shauque
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तू
मोहब्बत
नहीं
समझती
है
हम
भी
अपनी
अना
में
जलते
हैं
इस
दफा
बंदिशें
ज़ियादा
हैं
छोड़
अगले
जनम
में
मिलते
हैं
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Ritesh Rajwada
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उन
का
जो
फ़र्ज़
है
वो
अहल-ए-सियासत
जानें
मेरा
पैग़ाम
मोहब्बत
है
जहाँ
तक
पहुँचे
Jigar Moradabadi
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इश्क़
करके
तुम
अगर
शायर
नहीं
बन
पाए
तो
फिर
तुम्हारा
इश्क़
सच्चा
ही
नहीं
है
प्यारे
याँ
Daqiiq Jabaali
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वो
अगर
बे-वफ़ा
नहीं
होता
तो
मैं
भी
फिर
बुरा
नहीं
होता
सोचता
हूँ
कि
खु़द
ख़ुशी
कर
लूँ
क्या
करूँँ,
हौसला
नहीं
होता
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Daqiiq Jabaali
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मुझको
उस
लड़की
से
मिलकर
के
हुआ
इक
फायदा
ये
मेरा
अंदाज़
यारों
शायराना
हो
गया
Daqiiq Jabaali
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एक
तरफ़ा
किया
है
इश्क़
अमित
तुम
ने
तो
सो
उसे
बे-वफ़ा
कहकर
के
बुलाएँ
कैसे
Daqiiq Jabaali
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वो
तो
क़हहार
हो
के
बैठे
हैं
हम
परस्तार
हो
के
बैठे
हैं
रास्ते
तुमको
पाने
के
सारे
जान
दुश्वार
हो
के
बैठे
हैं
आप
आए
जो
मेरे
गुलशन
में
गुल
महक-दार
हो
के
बैठे
हैं
वो
ख़फ़ा
होगा
हमने
सोचा
था
तंज़
बेकार
हो
के
बैठे
हैं
रात-दिन
बस
तेरे
ख़यालों
में
हम
गिरफ़्तार
हो
के
बैठे
हैं
नोचने
जिस्म
एक
तितली
का
साँप
तैयार
हो
के
बैठे
हैं
दुनिया
तो
खै़र
ठीक
है
लेकिन
दोस्त
दीवार
हो
के
बैठे
हैं
मुझको
हथियार
की
ज़रूरत
क्या?
लफ्ज़
तलवार
हो
के
बैठे
हैं
कोई
अहद-ए-वफा़
करो
हम
सेे
हम
वफ़ादार
हो
के
बैठे
हैं
बात
करने
को
दिल
नहीं
करता
इतने
बेज़ार
हो
के
बैठे
हैं
उम्र
नादानी
करने
की
है
'अमित'
हम
समझदार
हो
के
बैठे
हैं
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Daqiiq Jabaali
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