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Amit Kumar
nahin hai bacha kuchh bhi ab paas mere
nahin hai bacha kuchh bhi ab paas mere | नहीं है बचा कुछ भी अब पास मेरे
- Amit Kumar
नहीं
है
बचा
कुछ
भी
अब
पास
मेरे
चले
जा
चुके
हैं
सभी
ख़ास
मेरे
उसे
याद
मैं
जो
न
रक्खा
करूँँ
तो
नहीं
आती
दुनिया
भी
ये
रास
मेरे
- Amit Kumar
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कर
रहा
था
ग़म-ए-जहाँ
का
हिसाब
आज
तुम
याद
बे-हिसाब
आए
Faiz Ahmad Faiz
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रात
भर
उन
का
तसव्वुर
दिल
को
तड़पाता
रहा
एक
नक़्शा
सामने
आता
रहा
जाता
रहा
Akhtar Shirani
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सुनो
हर-वक़्त
इतना
याद
भी
मत
कीजिए
हमको
कहीं
ऐसा
न
हो
की
हिचकियों
में
जाँ
निकल
जाए
Sandeep dabral 'sendy'
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बस
ये
दिक़्क़त
है
भुलाने
में
उसे
उसके
बदले
में
किस
को
याद
करें
Fahmi Badayuni
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आज
फिर
चाय
बनाते
हुए
वो
याद
आया
आज
फिर
चाय
में
पत्ती
नहीं
डाली
मैं
ने
Taruna Mishra
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उदासी
का
सबब
दो
चार
ग़म
होते
तो
कह
देता
फ़ुलाँ
को
भूल
बैठा
हूँ
फ़ुलाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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दिलों
को
तेरे
तबस्सुम
की
याद
यूँँ
आई
कि
जगमगा
उठें
जिस
तरह
मंदिरों
में
चराग़
Firaq Gorakhpuri
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ज़रूरत
सब
कराती
है
मोहब्बत
भी
इबादत
भी
नहीं
तो
कौन
बेमतलब
किसी
को
याद
करता
है
Umesh Maurya
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आख़िरी
बार
मैं
कब
उस
से
मिला
याद
नहीं
बस
यही
याद
है
इक
शाम
बहुत
भारी
थी
Hammad Niyazi
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कभी
तो
कोसते
होंगे
सफ़र
को
कभी
जब
याद
करते
होंगे
घर
को
निकल
पड़ती
हैं
औलादें
कमाने
परिंदे
खोल
ही
लेते
हैं
पर
को
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Siddharth Saaz
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ज़ेहन
में
अब
जैसे
बच्चे
आ
गए
हैं
हम
यहाँ
तक
हँसते
हँसते
आ
गए
हैं
तब
से
इतनी
बार
देखी
तेरी
फोटो
आँखों
के
अब
नीचे
गड्ढे
आ
गए
हैं
इक
भी
रस्ता
सच
नहीं
है
ज़िंदगी
का
देखो
कितने
लोग
चल
के
आ
गए
हैं
इक
तो
पहले
ही
वो
इतनी
ख़ूब-सूरत
और
फिर
आँखों
पे
चश्में
आ
गए
हैं
ज़िंदगी
ने
मारी
तब
तब
हम
को
ठोकर
जब
लगा
गिरते
सँभलते
आ
गए
हैं
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Amit Kumar
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बिना
बरसात
का
ये
साल
रहेगा
मिरा
तेरे
बिना
ये
हाल
रहेगा
जो
चले
साथ
दूर
तक
कहीं
हम
तुम
तो
बिछड़ने
का
फिर
मलाल
रहेगा
मैं
बता
दूँ
जवाब
कुछ
भी
उसे
पर
मिरे
मन
में
मगर
सवाल
रहेगा
दिया
है
साथ
उसका
ऐसे
कि
मुझ
को
न
करे
याद
पर
ख़याल
रहेगा
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Amit Kumar
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आती
है
मुझ
को
ख़ुद
पर
हँसी
ख़ुद
को
रोता
हुआ
सोच
कर
Amit Kumar
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इस
सोच
में
ही
मेरी
हर
रात
ढल
रही
है
बदले
हैं
लोग
या
फिर
दुनिया
बदल
रही
है
पानी
की
धार
पर
ये
मुझको
लगा
कि
जैसे
इक
सद
में
से
नदी
ये
बाहर
निकल
रही
है
मैं
कैसे
साथ
सबके
अपने
क़दम
मिलाऊँ
दुनिया
मिरी
समझ
से
कुछ
तेज़
चल
रही
है
वो
छाते
ही
अँधेरा
लगता
है
याद
आने
ये
देखो
शाम
भी
अब
जल्दी
से
ढल
रही
है
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Amit Kumar
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सच
है
मगर
सही
नहीं
ख़ुश
हूँ
मैं
पर
ख़ुशी
नहीं
अपनों
से
है
पता
चला
अपना
कोई
है
ही
नहीं
लगता
है
साथ
है
मिरे
वो
जो
कभी
था
भी
नहीं
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Amit Kumar
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