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Amit Kumar
sach hai magar sahi nahin
sach hai magar sahi nahin | सच है मगर सही नहीं
- Amit Kumar
सच
है
मगर
सही
नहीं
ख़ुश
हूँ
मैं
पर
ख़ुशी
नहीं
अपनों
से
है
पता
चला
अपना
कोई
है
ही
नहीं
लगता
है
साथ
है
मिरे
वो
जो
कभी
था
भी
नहीं
- Amit Kumar
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बारिशें
जाड़े
की
और
तन्हा
बहुत
मेरा
किसान
जिस्म
और
इकलौता
कंबल
भीगता
है
साथ-साथ
Parveen Shakir
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किसी
ने
ख़्वाब
में
आकर
मुझे
ये
हुक्म
दिया
तुम
अपने
अश्क
भी
भेजा
करो
दु'आओं
के
साथ
Afzal Khan
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बे-सबब
मुस्कुरा
रहा
है
चाँद
कोई
साज़िश
छुपा
रहा
है
चाँद
Gulzar
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मौत
के
साथ
हुई
है
मिरी
शादी
सो
'ज़फ़र'
उम्र
के
आख़िरी
लम्हात
में
दूल्हा
हुआ
मैं
Zafar Iqbal
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निभाया
जिस
सेे
भी
रिश्ता
तो
फिर
हद
में
रहे
हैं
हम
किसी
के
मखमली
तकिए
के
ऊपर
सर
नहीं
रक्खा
Nirbhay Nishchhal
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ज़िंदगी
तुझ
से
भी
क्या
ख़ूब
त'अल्लुक़
है
मिरा
जैसे
सूखे
हुए
पत्ते
से
हवा
का
रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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इस
से
पहले
कि
बिछड़
जाएँ
हम
दो
क़दम
और
मिरे
साथ
चलो
मुझ
सा
फिर
कोई
न
आएगा
यहाँ
रोक
लो
मुझको
अगर
रोक
सको
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Nasir Kazmi
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अब
मज़ीद
उस
सेे
ये
रिश्ता
नहीं
रक्खा
जाता
जिस
सेे
इक
शख़्स
का
पर्दा
नहीं
रक्खा
जाता
पढ़ने
जाता
हूँ
तो
तस्में
नहीं
बाँधे
जाते
घर
पलटता
हूँ
तो
बस्ता
नहीं
रक्खा
जाता
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Tehzeeb Hafi
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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सात
टुकड़े
हुए
मेरे
दिल
के
एक
हफ़्ता
लगा
सँभलने
में
Tanoj Dadhich
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ये
निशानी
रख
लो
अपनी
पास
अपने
क्या
करूँँगा
अब
मैं
इक
पुर्ज़ा
बचाकर
Amit Kumar
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मिल
गए
दो
किनारे
आपस
में
कितना
गहरा
है
इस
नदी
का
दुख
Amit Kumar
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सारा
कुछ
आधा
आधा
करते
हैं
प्यार
हम
कितना
ज़्यादा
करते
हैं
क्या
अजब
है
कि
दूर
जाके
सब
लौटने
का
इरादा
करते
हैं
करता
है
रोने
का
कभी
जब
मन
हँसने
का
फिर
बहाना
करते
हैं
ज़िन्दगी
इक
लिबास
है
जिसको
सब
पहन
के
दिखावा
करते
हैं
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Amit Kumar
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कुछ
तो
मेरे
क़दम
भी
बहके
हैं
कुछ
तो
झुमके
भी
तेरे
अच्छे
हैं
आप
सब
तो
बहुत
हैं
अच्छे
पर
बात
उसकी
ज़रा
सा
हट
के
है
है
नहीं
कोई
भी
किसी
का
पर
सब
सभी
के
यहाँ
पे
लगते
हैं
छोड़
जाए
जो
इश्क़
में
कोई
तो
सभी
लगते
एक
जैसे
हैं
जल्द
बाजी
में
लोग
अब
अक्सर
ज़िंदगी
देर
से
समझते
हैं
सबकी
तन्हाई
पे
लगा
ये
हम
पागलों
को
नहीं
समझते
हैं
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Amit Kumar
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नहीं
है
बचा
कुछ
भी
अब
पास
मेरे
चले
जा
चुके
हैं
सभी
ख़ास
मेरे
उसे
याद
मैं
जो
न
रक्खा
करूँँ
तो
नहीं
आती
दुनिया
भी
ये
रास
मेरे
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Amit Kumar
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