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Amit Kumar
aati hai mujh ko KHud par hañsi
aati hai mujh ko KHud par hañsi | आती है मुझ को ख़ुद पर हँसी
- Amit Kumar
आती
है
मुझ
को
ख़ुद
पर
हँसी
ख़ुद
को
रोता
हुआ
सोच
कर
- Amit Kumar
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कौन
सी
बात
कहाँ
कैसे
कही
जाती
है
ये
सलीक़ा
हो
तो
हर
बात
सुनी
जाती
है
एक
बिगड़ी
हुई
औलाद
भला
क्या
जाने
कैसे
माँ-बाप
के
होंठों
से
हँसी
जाती
है
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Waseem Barelvi
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चला
तो
हूँ
मैं
उन
के
दर
से
बिगड़
कर
हँसी
आ
रही
है
कि
आना
पड़ेगा
Khumar Barabankvi
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ज़ोर
चलता
है
औरत
पे
सो
मर्द
ख़ुश
बीवी
पे
ख़त्म
मर्दानगी
की
समझ
Neeraj Neer
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ये
ख़ुश
आँखें
किसी
दिन
रो
पड़ेंगी
और
किसी
दिन
मुस्कुराएंगी
उदास
आँखें
Siddharth Saaz
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उम्र
के
आख़िरी
मक़ाम
में
हम
मिल
भी
जाए
तो
क्या
ख़ुशी
होगी
क्या
सितम
तुम
को
देखने
के
लिए
हम
को
दुनिया
भी
देखनी
होगी
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Vikram Sharma
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नाम
पे
हम
क़ुर्बान
थे
उस
के
लेकिन
फिर
ये
तौर
हुआ
उस
को
देख
के
रुक
जाना
भी
सब
से
बड़ी
क़ुर्बानी
थी
मुझ
से
बिछड़
कर
भी
वो
लड़की
कितनी
ख़ुश
ख़ुश
रहती
है
उस
लड़की
ने
मुझ
से
बिछड़
कर
मर
जाने
की
ठानी
थी
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Jaun Elia
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ख़ुशी
में
भी
ख़ुशी
होती
नहीं
अब
तेरा
ग़म
ही
सतह
पर
तैरता
है
Umesh Maurya
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मुद्दत
के
बाद
उस
ने
जो
की
लुत्फ़
की
निगाह
जी
ख़ुश
तो
हो
गया
मगर
आँसू
निकल
पड़े
Kaifi Azmi
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हुनर
से
काम
लिया
पेंट
ब्रश
नहीं
तोड़ा
बना
लिया
तेरे
जैसा
ही
कोई
रंगों
से
मुझे
ये
डर
है
कि
मिल
जाएगी
तो
रो
दूँगा
मैं
जिस
ख़ुशी
को
तरसता
रहा
हूँ
बरसों
से
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Rahul Gurjar
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ये
कह
के
दिल
ने
मिरे
हौसले
बढ़ाए
हैं
ग़मों
की
धूप
के
आगे
ख़ुशी
के
साए
हैं
Mahirul Qadri
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कोई
भी
अब
भला
नहीं
लगता
इसलिए
ग़म
नया
नहीं
लगता
ज़िंदगी
आधी
जा
चुकी
है
पर
ज़िंदगी
का
पता
नहीं
लगता
इक
वो
ही
शख़्स
है
जहाँ
में
बस
कुछ
भी
कह
दे
बुरा
नहीं
लगता
इस
पे
चिपकी
उदासी
मुझ
सेे
मैं
आजकल
ख़ुश-नुमा
नहीं
लगता
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Amit Kumar
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ज़ेहन
में
अब
जैसे
बच्चे
आ
गए
हैं
हम
यहाँ
तक
हँसते
हँसते
आ
गए
हैं
तब
से
इतनी
बार
देखी
तेरी
फोटो
आँखों
के
अब
नीचे
गड्ढे
आ
गए
हैं
इक
भी
रस्ता
सच
नहीं
है
ज़िंदगी
का
देखो
कितने
लोग
चल
के
आ
गए
हैं
इक
तो
पहले
ही
वो
इतनी
ख़ूब-सूरत
और
फिर
आँखों
पे
चश्में
आ
गए
हैं
ज़िंदगी
ने
मारी
तब
तब
हम
को
ठोकर
जब
लगा
गिरते
सँभलते
आ
गए
हैं
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Amit Kumar
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फूल
भी
जब
है
तकता
तुझे
क्यूँ
न
फिर
कहता
अच्छा
तुझे
भूल
जाता
हूँ
ग़म
सारे
मैं
देखता
जब
हूँ
हँसता
तुझे
शूट
साड़ी
भी
फिर
शर्ट
भी
सारा
कुछ
तो
है
जँचता
तुझे
होगा
इतराया
कुछ
तो
ख़ुदा
देखा
जब
होगा
बनता
तुझे
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Amit Kumar
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पहले
देखो
तुम
मटमैली
जड़
को
जाके
फिर
गर
चाहो
तो
सारे
गुलाब
देखो
Amit Kumar
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इश्क़
इक
करना
पर
सही
करना
क्योंकि
अब
आम
है
ठगी
करना
कितनी
ही
बार
करके
देखी
है
यार
मुश्किल
है
ख़ुद-कुशी
करना
जीना
है
सीख
लेना
फिर
दिल
में
कुछ
भी
हो
बात
शरबती
करना
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Amit Kumar
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