laute kuchh is tarah tiri jalwa-sara se ham | लौटे कुछ इस तरह तिरी जल्वा-सरास हम

  - Amir Usmani
लौटेकुछइसतरहतिरीजल्वा-सरासहम
बनतेगएक़दम-ब-क़दमआइनासेहम
इसदर्जापाएमालहोतेजफ़ासेहम
लूटेगएसियासत-ए-मेहर-ओ-वफ़ासेहम
बाक़ीहीक्यारहाहैतुझेमाँगनेकेबाद
बसइकदु'आमेंछूटगएहरदु'आसेहम
देखीगईहमसेशिकस्त-ए-ग़ुरूर-ए-हुस्न
शरमागएइरादा-ए-तर्क-ए-वफ़ासेहम
येक्याकहाजुनूँहैमोहब्बतकीइंतिहा
बे-ख़बरचलेहैंइसीइंतिहासेहम
मानाकिदिलकोतेरेमिलनेकाग़मरहा
सदशुक्रबचगएतलब-ए-मा-सिवासेहम
  - Amir Usmani
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