dil pe vo vaqt bhi kis darja giran hota hai | दिल पे वो वक़्त भी किस दर्जा गिराँ होता है

  - Amir Usmani
दिलपेवोवक़्तभीकिसदर्जागिराँहोताहै
ज़ब्तजबदाख़िल-ए-फ़रियाद-ओ-फ़ुग़ाँहोताहै
कैसेबतलाएँकिवोदर्दकहाँहोताहै
ख़ूनबनकरजोरग-ओ-पैमेंरवाँहोताहै
इश्क़हीकबहैजोमानूस-ए-ज़बाँहोताहै
दर्दहीकबहैजोमोहताज-ए-बयाँहोताहै
जितनीजितनीसितम-ए-यारसेखाताहैशिकस्त
दिलजवाँऔरजवाँऔरजवाँहोताहै
वाहक्याचीज़हैयेशिद्दत-ए-रब्त-ए-बाहम
बार-हाख़ुदपेमुझेतेरागुमाँहोताहै
कितनीपामालउमंगोंकाहैमदफ़नमतपूछ
वोतबस्सुमजोहक़ीक़तमेंफ़ुग़ाँहोताहै
इश्क़सर-ता-ब-क़दमआतिश-ए-सोज़ाँहैमगर
उसमेंशोलाशराराधुआँहोताहै
क्यायेइंसाफ़हैख़ालिक़-ए-सुब्ह-ए-गुलशन
कोईहँसताहैकोईगिर्या-कुनाँहोताहै
ग़मकीबढ़तीहुईयूरिशसेघबरा'आमिर'
ग़मभीइकमंज़िल-ए-राहतकानिशाँहोताहै
  - Amir Usmani
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