khayaal-e-yaar ka sikka uchaalne men gaya | ख़याल-ए-यार का सिक्का उछालने में गया

  - Amir Hamza Saqib
ख़याल-ए-यारकासिक्काउछालनेमेंगया
जुनूँख़रीता-ए-ज़रथासँभालनेमेंगया
लहूजिगरकाहुआसर्फ़-ए-रंग-ए-दस्त-ए-हिना
जोसौदासरमेंथासहराखंगालनेमेंगया
गुरेज़-पाथाबहुतहुस्न-पारा-ए-हस्ती
सोअर्साउम्रकाज़ंजीरडालनेमेंगया
निहालयादोंकीचाँदीमेंशबतोदिनसारा
किसीकेज़िक्रकासोनाउछालनेमेंगया
थीदस्त-गाहबयाँपरमगरकमाल-ए-हुनर
ग़म-ए-हयातकेक़िस्सोंकोटालनेमेंगया
  - Amir Hamza Saqib
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