tire khayal ke jab shaamiyaane lagte hain | तिरे ख़याल के जब शामियाने लगते हैं

  - Amir Hamza Saqib
तिरेख़यालकेजबशामियानेलगतेहैं
सुख़नकेपाँवमिरेलड़खड़ानेलगतेहैं
जोएकदस्त-ए-बुरीदासवाद-ए-शौक़मेंहै
अलमउठाएहुएउसकेशानेलगतेहैं
मैंदश्त-ए-हूकीतरफ़जबउड़ानभरताहूँ
तिरीसदाकेशजरफिरबुलानेलगतेहैं
ख़बरभीहैतुझेइसदफ़्तर-ए-मोहब्बतको
जलानेजलनेमेंक्याक्याज़मानेलगतेहैं
येगर्दहैमिरीआँखोंमेंकिनज़मानोंकी
नएलिबासभीअबतोपुरानेलगतेहैं
तुम्हारेमेवा-ए-लबकोनिगहसेछूतेही
अजीबलज़्ज़त-ए-नायाबपानेलगतेहैं
जोसनसनाताहैकूफ़ानैनवाकाख़याल
गुलू-ए-जाँकीतरफ़तीरआनेलगतेहैं
  - Amir Hamza Saqib
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