na to be-karaani-e-dil rahi na to madd-o-jazr-e-talab raha | न तो बे-करानी-ए-दिल रही न तो मद्द-ओ-जज़्र-ए-तलब रहा

  - Amir Hamza Saqib
तोबे-करानी-ए-दिलरहीतोमद्द-ओ-जज़्र-ए-तलबरहा
तिरेबादबहर-ए-ख़यालमेंख़रोशउठाग़ज़बरहा
मिरेसामनेसेगुज़रगयावोग़ज़ालदश्त-ए-मुरादका
मैंखड़ारहायूँँहीबे-सदामुझेपास-ए-हद-ए-अदबरहा
उसेजाँ-गुज़ारोंसेक्याशग़फ़उसेख़ाकसारोंसेक्याशरफ़
वोफ़ज़ीलातोंकेदयारमेंब-हुज़ूरपा-ए-नसबरहा
वहीबैअत-ए-ग़म-ए-हिज्रथीवहीकश्फ़-ए-हुजरा-ए-वस्लथा
मैंमुरीद-ए-हल्क़ा-ए-ख़्वाबथासोक़रीन-ए-मुर्शिद-ए-लबरहा
तिरीमम्लिकतकेनिसाबपरकोईतब्सिराभीकरेतोक्या
वहीरौशनीकासफ़ीरहैजोअसीर-ए-ज़ुल्मत-ए-शबरहा
  - Amir Hamza Saqib
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