dard ka shahar kahii karb ka sehra hogaa | दर्द का शहर कहीं कर्ब का सहरा होगा

  - Ameer Qazalbash
दर्दकाशहरकहींकर्बकासहराहोगा
लोगवाक़िफ़थेकोईघरसेनिकलाहोगा
वोजोइकशख़्सब-ज़िदहैकिभुलादोमुझको
भूलजाऊँतोउसीशख़्सकोसदमाहोगा
आँखखुलतेहीबिछड़जाएगाहरमंज़र-ए-शब
चाँदफिरसुब्हकेमक़्तलमेंअकेलाहोगा
जिनउजालोंकीतरफ़दौड़रहीहैदुनिया
उनउजालोंमेंक़यामतकाअँधेराहोगा
एकउम्मीदहरइकदरपेलिएजातीहै
येमिराशहरथाकोईतोशनासाहोगा
  - Ameer Qazalbash
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