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Ambar
phirse rishta nibha sakte ho
phirse rishta nibha sakte ho | फिरसे रिश्ता निभा सकते हो
- Ambar
फिरसे
रिश्ता
निभा
सकते
हो
चाहो
गर
तो
मना
सकते
हो
अब
तो
इसकी
आदत
सी
है
तुम
भी
छोड़
के
जा
सकते
हो
ख़ाब
कि
जिस
में
हम
और
तुम
थे
सच
कर
के
दिखला
सकते
हो
मैंने
तुम
सेे
कब
ये
कहा
था
तारे
तोड़
के
ला
सकते
हो
लफ्ज़
वही
इज़हार-ए-वफ़ा
का
फिर
से
क्या
दोहरा
सकते
हो
'अंबर'
तुम
से
कुछ
नहीं
होगा
बस
बातें
ही
बना
सकते
हो
- Ambar
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मैं
शाइर
उसको
चूड़ी
ही
दे
सकता
था
बस
रिश्ता
सोने
के
कंगन
देने
पर
होता
है
Neeraj Neer
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निभाया
जिस
सेे
भी
रिश्ता
तो
फिर
हद
में
रहे
हैं
हम
किसी
के
मखमली
तकिए
के
ऊपर
सर
नहीं
रक्खा
Nirbhay Nishchhal
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उसने
हँसते
हुए
तोड़ा
था
हमारा
रिश्ता
हम
सभी
को
ये
बताते
हुए
रो
देते
हैं
Zubair Alam
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लो
आज
हमने
तोड़
दिया
रिश्ता-ए-उम्मीद
लो
अब
कभी
गिला
न
करेंगे
किसी
से
हम
Sahir Ludhianvi
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मेरे
दर्द
की
वो
दवा
है
मगर
मेरा
उस
सेे
कोई
भी
रिश्ता
नहीं
मुसलसल
मिलाता
है
मुझ
सेे
नज़र
मैं
कैसे
कहूँ
वो
फ़रिश्ता
नहीं
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S M Afzal Imam
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जीत
भी
लूँ
गर
लड़ाई
तुम
से
मैं
तो
क्या
मिलेगा
हाथ
में
दोनों
के
बस
इक
टूटा
सा
रिश्ता
मिलेगा
कर
के
लाखों
कोशिशें
गर
जो
बचा
भी
लूँ
मैं
रिश्ता
तो
नहीं
फिर
मन
हमारा
पहले
के
जैसा
मिलेगा
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Ankit Maurya
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अपना
रिश्ता
ज़मीं
से
ही
रक्खो
कुछ
नहीं
आसमान
में
रक्खा
Jaun Elia
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ज़िंदगी
तुझ
से
भी
क्या
ख़ूब
त'अल्लुक़
है
मिरा
जैसे
सूखे
हुए
पत्ते
से
हवा
का
रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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अब
मज़ीद
उस
सेे
ये
रिश्ता
नहीं
रक्खा
जाता
जिस
सेे
इक
शख़्स
का
पर्दा
नहीं
रक्खा
जाता
पढ़ने
जाता
हूँ
तो
तस्में
नहीं
बाँधे
जाते
घर
पलटता
हूँ
तो
बस्ता
नहीं
रक्खा
जाता
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Tehzeeb Hafi
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क्या
जाने
किस
ख़ता
की
सज़ा
दी
गई
हमें
रिश्ता
हमारा
दार
पे
लटका
दिया
गया
शादी
में
सब
पसंद
का
लाया
गया
मगर
अपनी
पसंद
का
उसे
दूल्हा
नहीं
मिला
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Afzal Ali Afzal
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वो
भूल
गया
मुझको
चाहे
ये
हक़ीक़त
हो
कर
याद
मुझे
तन्हा
रोता
तो
कभी
होगा
Ambar
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ज़रा
सी
अपनी
बात
नहीं
मिलने
पे
तुम
यूँँ
रूठे
हो
जैसे
उलफ़त
थी
ही
नहीं
Ambar
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है
कोई
जो
दाग़
मेरे
धो
सकेगा
क्या
कभी
सच
में
भी
ऐसा
हो
सकेगा
जिसकी
झोली
भरता
है
तू
मंदिरों
में
तेरी
झोली
में
वो
ख़ुशियाँ
बो
सकेगा
नाम
जप
ले
लड़
के
मर
जा
उसकी
ख़ातिर
कुछ
भी
करले
पा
नहीं
उसको
सकेगा
मैं
भी
कर
लूँ
तेरे
जैसी
अंधभक्ति
माफ़
करना
ये
न
मुझ
सेे
हो
सकेगा
क्यूँ
करूँँ
मैं
उसकी
ख़ातिर
वक़्त
बर्बाद
जो
न
मेरे
आँसुओं
पे
रो
सकेगा
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ग़ैर
से
नाता
जोड़
सकोगे
सच
में
क्या
मुझ
सेे
रिश्ता
तोड़
सकोगे
सच
में
क्या
तुम
सेे
पहले
जो
भी
मेरी
दुनिया
थी
तुम
वो
दुनिया
मोड़
सकोगे
सच
में
क्या
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Ambar
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करना
जो
था
वो
कर
नहीं
पाया
मैं
तो
मर
के
भी
मर
नहीं
पाया
आज
भी
उसको
याद
करता
हूँ
क्यूँ
मैं
अब
तक
सुधर
नहीं
पाया
जो
तमन्ना
उगाई
थी
हमने
बस
वही
इक
शजर
नहीं
पाया
ख़ाक
छानी
ज़माने
की
लेकिन
एक
तेरा
ही
दर
नहीं
पाया
वो
बुरा
लाख
था
मगर
वो
शख़्स
दिल
से
मेरे
उतर
नहीं
पाया
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Ambar
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