har farz nibhaana hai kabhi ye nahin socha | हर फ़र्ज़ निभाना है, कभी, ये नहीं सोचा

  - Altaf Iqbal
हरफ़र्ज़निभानाहै,कभी,येनहींसोचा
चालाकज़मानाहै,कभी,येनहींसोचा
बच्चोंकीतोबसफ़ीसहीभरकरहुएख़ुशहम
इनकोतोपढ़ानाहैकभी,येनहींसोचा
क्यासादादिलीहै,केसतायामुझेजिसने
अबउसकोसतानाहै,कभी,येहींसोचा
दौलतकोकमानेमेंयहाँउम्रगवाँदी
इकरोज़तोजानाहै,कभी,येनहींसोचा
दुनियामेंहमेंजोभीमिला,उस्सेवफ़ाकी
हरशख़्ससयानाहै,कभी,येनहींसोचा
सुनकरहुएसबख़ुश,यहाँदुनियाकीकहानी
दोदिनकाफ़सानाहै,कभी,येनहींसोचा
दौलतनहींयेसोचकेलड़कीकोकियातर्क
अच्छावोघरानाहै,कभी,येनहींसोचा
'अल्ताफ़'रहेमस्तफ़क़ीरीमेंहमेशा
ठोकरमेंज़मानाहै,कभी,येनहींसोचा
  - Altaf Iqbal
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