waqt lagta hai zamaane pe asar hone tak | वक़्त लगता है ज़माने पे असर होने तक

  - Altaf Iqbal
वक़्तलगताहैज़मानेपेअसरहोनेतक
दादकीफ़िक्रनहींअर्ज़-ए-हुनरहोनेतक
आतिश-ए-हिज्रमेंजलतेहैंशररहोनेतक
बूझजाएकहींहमलोगसहरहोनेतक
तुमकिसीघरकोहिक़ारतसेदेखोयारो
उम्रलगतीहैयहाँठाटकाघरहोनेतक
दिनगुज़रताहैइसीसोचमेंहररोज़मिरा
रातकिसहालमेंगुज़रेगीसहरहोनेतक
यूँँतोमुश्किलभीमगरआजग़ज़लकीज़ुल्फ़ें
हमसँवारेगेयहाँरातबसरहोनेतक
आजउनलोगोंनेपलकोंपेबिठारखाहै
कलकोजोख़ुशथेमेरेज़ेर-ओ-ज़बरहोनेतक
आयाजायाकरोकूचेमेंहमारे,वरना
"ख़ाकहोजाएँगेहमतुमकोख़बरहोनेतक"
होजोअल्ताफ़निगाहोंमेंकभीताब-ए-नज़र
देखतेजाईयेक़तरेकोगुहरहोनेतक
  - Altaf Iqbal
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy