samundron ko uthaaye firee ghatta barson | समुंदरों को उठाए फिरी घटा बरसों

  - Altaf Parwaz
समुंदरोंकोउठाएफिरीघटाबरसों
मगरमैंप्यासअपनीबिछासकाबरसों
बसइतनायादहैतुझसेमिलाथारस्तेमें
फिरअपनेआपसेरहनापड़ाजुदाबरसों
मैंएकउम्रभटकतारहाहूँसहरामें
किमेरीख़ाकउड़ातीरहीहवाबरसों
हमीनेदामन-ए-शबकोहाथसेछोड़ा
सहरकेगीतसुनातीरहीसबाबरसों
नसीमशाख़-ए-गुल-ए-तरसेक्यूँँउलझतीहै
चमनमेंफूलअगरफिरखिलसकाबरसों
तुम्हीनेराह-ए-वफ़ापरक़दमरखाकभी
चराग़बनकेमैंहरमोड़परजलाबरसों
किरनकिरनमुझेपर्वाज़कीनवेदहैआज
रहाहूँतेरीफ़ज़ाओंमेंपर-कुशाबरसों
  - Altaf Parwaz
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