laakh teri hi tarah kyuuñ na paraaya hota | लाख तेरी ही तरह क्यूँ न पराया होता

  - Altaf Parwaz
लाखतेरीहीतरहक्यूँपरायाहोता
तुझसाकोईतोमिरेध्यानमेंआयाहोता
वक़्तकेसाथतोचलताहैज़मानासारा
वक़्तकेसाथमिरीतरहनिभायाहोता
मैंतिरेशहरमेंतन्हाहूँजानेकबसे
तूहोतातिरीदीवारकासायाहोता
खिलखिलातेहुएलम्होंसेलिपटनेवालो
रूठनेवालीरुतोंकोभीमनायाहोता
यूँँतोहरएकशबिस्ताँहैमुनव्वरतुझसे
कभीमेराभीकोईख़्वाबसजायाहोता
लेगयासाथउड़ाकरमेरीनींदें'पर्वाज़'
ध्यानमेंकाशवोशख़्ससमायाहोता
  - Altaf Parwaz
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