main to main gair ko marne se ab inkaar nahin | मैं तो मैं ग़ैर को मरने से अब इंकार नहीं

  - Altaf Hussain Hali
मैंतोमैंग़ैरकोमरनेसेअबइंकारनहीं
इकक़यामतहैतिरेहाथमेंतलवारनहीं
कुछपतामंज़िल-ए-मक़्सूदकापायाहमने
जबयेजानाकिहमेंताक़त-ए-रफ़्तारनहीं
चश्म-ए-बद-दूरबहुतफिरतेहैंअग़्यारकेसाथ
ग़ैरत-ए-इश्क़सेअबतकवोख़बर-दारनहीं
होचुकानाज़उठानेमेंहैगोकामतमाम
लिल्लाहिल-हम्दकिबाहमकोईतकरारनहीं
मुद्दतोंरश्कनेअग़्यारसेमिलनेदिया
दिलनेआख़िरयेदियाहुक्मकिकुछआरनहीं
अस्लमक़्सूदकाहरचीज़मेंमिलताहैपता
वर्नाहमऔरकिसीशयकेतलबगारनहीं
बातजोदिलमेंछुपातेनहींबनती'हाली'
सख़्तमुश्किलहैकिवोक़ाबिल-ए-इज़हारनहीं
  - Altaf Hussain Hali
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