gham-e-furqat hi men marna ho to dushwaar nahin | ग़म-ए-फ़ुर्क़त ही में मरना हो तो दुश्वार नहीं

  - Altaf Hussain Hali
ग़म-ए-फ़ुर्क़तहीमेंमरनाहोतोदुश्वारनहीं
शादी-ए-वस्लभी'आशिक़कोसज़ा-वारनहीं
ख़ूब-रूईकेलिएज़िश्ती-ए-ख़ूभीहैज़रूर
सचतोयेहैकिकोईतुझसातरह-दारनहीं
क़ौलदेनेमेंतअम्मुलक़समसेइंकार
हमकोसच्चानज़रआताकोईइक़रारनहीं
कलख़राबातमेंइकगोशेसेआतीथीसदा
दिलमेंसबकुछहैमगररुख़्सत-ए-गुफ़्तारनहीं
हक़हुआकिससेअदाउसकीवफ़ादारीका
जिसकेनज़दीकजफ़ाबाइस-ए-आज़ारनहीं
देखतेहैंकिपहुँचतीहैवहाँकौनसीराह
काबादैरसेकुछहमकोसरोकारनहीं
होंगेक़ाइलवोअभीमतला-ए-सानीसुनकर
जोतजल्लीमेंयेकहतेहैंकितकरारनहीं
  - Altaf Hussain Hali
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