hai justuju ki khoob se hai khoob-tar kahaan | है जुस्तुजू कि ख़ूब से है ख़ूब-तर कहाँ

  - Altaf Hussain Hali
हैजुस्तुजूकिख़ूबसेहैख़ूब-तरकहाँ
अबठहरतीहैदेखिएजाकरनज़रकहाँ
हैंदौर-ए-जाम-ए-अव्वल-ए-शबमेंख़ुदीसेदूर
होतीहैआजदेखिएहमकोसहरकहाँ
यारबइसइख़्तिलातकाअंजामहोब-ख़ैर
थाउसकोहमसेरब्तमगरइसक़दरकहाँ
इकउम्रचाहिएकिगवाराहोनीश-ए-इश्क़
रक्खीहैआजलज़्ज़त-ए-ज़ख़्म-ए-जिगरकहाँ
बसहोचुकाबयाँकसल-ओ-रंज-ए-राहका
ख़तकामिरेजवाबहैनामा-बरकहाँ
कौनमकाँसेहैदिल-ए-वहशीकनारा-गीर
इसख़ानुमाँ-ख़राबनेढूँडाहैघरकहाँ
हमजिसपेमररहेहैंवोहैबातहीकुछऔर
आलममेंतुझसेलाखसहीतूमगरकहाँ
होतीनहींक़ुबूलदु'आतर्क-ए-इश्क़की
दिलचाहताहोतोज़बाँमेंअसरकहाँ
'हाली'नशात-ए-नग़्मा-ओ-मयढूँढतेहोअब
आएहोवक़्त-ए-सुब्हरहेरातभरकहाँ
  - Altaf Hussain Hali
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