kya kahooñ dil to giraftaar-e-bala hai ab tak | क्या कहूँ दिल तो गिरफ़्तार-ए-बला है अब तक

  - Altaf Ahmad Aazmi
क्याकहूँदिलतोगिरफ़्तार-ए-बलाहैअबतक
कौनदुश्मनहैजोइसघरमेंछुपाहैअबतक
किसकोइल्ज़ामदूँबख़्त-ए-सितमगरतूबता
फूलदेकरमुझेपत्थरहीमिलाहैअबतक
बंदहैबाब-ए-इजाबततोकोईक्यामाँगे
इकमिरादस्तदुआहैकिउठाहैअबतक
कौनहूँयेनहींमालूममगरहूँमौजूद
इतनीहीबातकाइदराकहुआहैअबतक
ख़ारतोख़ारहैक्यूँउसकोउठायामैंने
अपनेहीदिलकीमुरव्वतसेगिलाहैअबतक
होगएमुझसेजुदासारेरफ़ीक़ान-ए-सफ़र
इकफ़क़तदर्दहैपहलूसेलगाहैअबतक
कोईबदलानहींइसदौर-ए-ख़िरदमें'अहमद'
एकमैंहूँकिजिसेपास-ए-वफ़ाहैअबतक
  - Altaf Ahmad Aazmi
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