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Jaun Elia
gham-e-furqat ka shikwa karne waali
gham-e-furqat ka shikwa karne waali | ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली
- Jaun Elia
ग़म-ए-फ़ुर्क़त
का
शिकवा
करने
वाली
मेरी
मौजूदगी
में
सो
रही
है
- Jaun Elia
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मुसाफ़िरों
के
दिमाग़ों
में
डर
ज़ियादा
है
न
जाने
वक़्त
है
कम
या
सफ़र
ज़ियादा
है
Hashim Raza Jalalpuri
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निगाहें
फेर
ली
घबरा
के
मैंने
वो
तुम
से
ख़ूब-सूरत
लग
रही
थी
Fahmi Badayuni
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ये
शाम
ख़ुशबू
पहन
के
तेरी
ढली
है
मुझ
में
जो
रेज़ा
रेज़ा
मैं
क़तरा
क़तरा
पिघल
रही
हूँ
ख़मोश
शब
के
समुंदरों
में
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Kiran K
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किसी
को
घर
से
निकलते
ही
मिल
गई
मंज़िल
कोई
हमारी
तरह
उम्र
भर
सफ़र
में
रहा
Ahmad Faraz
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मुझ
में
अब
मैं
नहीं
रही
बाक़ी
मैं
ने
चाहा
है
इस
क़दर
तुम
को
Ambreen Haseeb Ambar
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जिस
मौसम
में
भीगना
है
हम
दोनों
को
उस
मौसम
में
पूछ
रही
हो
छाता
है
Zubair Alam
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बर्बाद
कर
दिया
हमें
परदेस
ने
मगर
माँ
सब
से
कह
रही
है
कि
बेटा
मज़े
में
है
Munawwar Rana
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उन्हीं
रास्तों
ने
जिन
पर
कभी
तुम
थे
साथ
मेरे
मुझे
रोक
रोक
पूछा
तिरा
हम-सफ़र
कहाँ
है
Bashir Badr
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मुक़र्रर
दिन
नहीं
तो
लम्हा-ए-इमकान
में
आओ
अगर
तुम
मिल
नहीं
सकती
तो
मेरे
ध्यान
में
आओ
बला
की
ख़ूब-सूरत
लग
रही
हो
आज
तो
जानाँ
मुझे
इक
बात
कहनी
थी
तुम्हारे
कान
में..
आओ
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Darpan
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मेरी
हर
बात
बे-असर
ही
रही
नक़्स
है
कुछ
मिरे
बयान
में
क्या
Jaun Elia
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इक
हुनर
है
जो
कर
गया
हूँ
मैं
सब
के
दिल
से
उतर
गया
हूँ
मैं
Jaun Elia
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रूहों
के
पर्दा-पोश
गुनाहों
से
बे-ख़बर
जिस्मों
की
नेकियाँ
ही
गिनाता
रहा
हूँ
मैं
Jaun Elia
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हुस्न
बला
का
क़ातिल
हो
पर
आख़िर
को
बेचारा
है
इश्क़
तो
वो
क़ातिल
जिसने
अपनों
को
भी
मारा
है
ये
धोखे
देता
आया
है
दिल
को
भी
दुनिया
को
भी
इसके
छल
ने
खार
किया
है
सहरा
में
लैला
को
भी
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Jaun Elia
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अपनी
मंज़िल
का
रास्ता
भेजो
जान
हम
को
वहाँ
बुला
भेजो
क्या
हमारा
नहीं
रहा
सावन
ज़ुल्फ़
याँ
भी
कोई
घटा
भेजो
नई
कलियाँ
जो
अब
खिली
हैं
वहाँ
उन
की
ख़ुश्बू
को
इक
ज़रा
भेजो
हम
न
जीते
हैं
और
न
मरते
हैं
दर्द
भेजो
न
तुम
दवा
भेजो
धूल
उड़ती
है
जो
उस
आँगन
में
उस
को
भेजो
सबा
सबा
भेजो
ऐ
फकीरो
गली
के
उस
गुल
की
तुम
हमें
अपनी
ख़ाक-ए-पा
भेजो
शफ़क़-ए-शाम-ए-हिज्र
के
हाथों
अपनी
उतरी
हुई
क़बा
भेजो
कुछ
तो
रिश्ता
है
तुम
से
कम-बख़्तों
कुछ
नहीं
कोई
बद-दुआ'
भेजो
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Jaun Elia
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बिन
तुम्हारे
कभी
नहीं
आई
क्या
मिरी
नींद
भी
तुम्हारी
है
Jaun Elia
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