jalwa-ha-e-zindagi ko kya kahein | जल्वा-हा-ए-ज़िंदगी को क्या कहें

  - Altaf Ahmad Aazmi
जल्वा-हा-ए-ज़िंदगीकोक्याकहें
चारदिनकीचाँदनीकोक्याकहें
देखतेहैंचेहरा-ए-ख़ाशाकभी
फूलतेरीताज़गीकोक्याकहें
तिफ़्ल-ए-मकतबकीनज़रभीक्यानज़र
अक़्लतेरीरहबरीकोक्याकहें
आँधियोंसेदेखिएउसकाग़ुरूर
ख़ाक-ए-पाकीआजिज़ीकोक्याकहें
दिलग़म-ओ-अंदोहसेख़ालीतोहो
लाला-ओ-गुलकीहँसीकोक्याकहें
कुछनहींसबखेलहैतक़दीरका
वक़्ततेरीबे-रुख़ीकोक्याकहें
सबसेकहदेताहै'अहमद'हाल-ए-दिल
उसकेदिलकीसादगीकोक्याकहें
  - Altaf Ahmad Aazmi
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