कभीपढ़ोतोमुझेहर्फ़-ए-मो'तबरकीतरह
येक्याकिपढ़तेहोफ़र्सूदासीख़बरकीतरह
क़लमतोकरतेहोसरकोमिरेमगरसुनलो
मैंरेग-ज़ार-ए-वफ़ामेंहूँएकशजरकीतरह
उदासीखोलकेबालअपनासोरहीहैयहाँ
किजैसेशहरमेंहरघरहैमेरेघरकीतरह
हमारेज़ौक़-ए-परस्तिशकोतुमदुआएँदो
चमकरहेहैंयेपत्थरजोअबगुहरकीतरह
मशाम-ए-जाँमेंअभीतकहैउसबदनकीबास
खिलाथारातजोइकग़ुंचा-ए-सहरकीतरह
हरएकसंगपतापूछताहैघरकामिरे
नहींहैक्याकोईसरऔरमेरेसरकीतरह
नवाह-ए-जाँमेंउजालोंकारक़्सहै'शिबली'
येकौनआयादबेपाँवयूँँसहरकीतरह