har ek zehan men saara hisaab rehta hai | हर एक ज़ेहन में सारा हिसाब रहता है

  - Alok Yadav
हरएकज़ेहनमेंसाराहिसाबरहताहै
सवालसुननेसेपहलेजवाबरहताहै
वोएकमोड़जहाँएकदिनलुटाथामैं
वहींमिरादिल-ए-ख़ाना-ख़राबरहताहै
हवाकेदमपेहैजबज़िंदगीकादार-ओ-मदार
तोक्यूँँग़ुरूरतुझेहबाबरहताहै
चलेगीचालकोईगर्दिश-ए-फ़लकशायद
कईदिनोंसेबड़ाइज़्तिराबरहताहै
वोझोलीकैसेभरेप्यारकरनेवालोंकी
इसीफ़िराक़मेंटूटाशहाबरहताहै
मिरेलिएहैंमुसीबतयेआइना-ख़ाने
यहाँज़मीरमिराबे-नक़ाबरहताहै
हसीनख़्वाबहोंकितनेहीपरकोई'आलोक'
तमामउम्रकहाँमहव-ए-ख़्वाबरहताहै
  - Alok Yadav
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