bhare jo zakham to daaghoon se kyun uljhen | भरे जो ज़ख़्म तो दाग़ों से क्यूँँ उलझें?

  - Alok Yadav
भरेजोज़ख़्मतोदाग़ोंसेक्यूँँउलझें?
गईजोबीतउनबातोंसेक्यूँँउलझें?
उठाकरताक़पेरखदेंसभीयादें
नहींजोतूतिरीयादोंसेक्यूँँउलझें?
ख़ुदामौजूदहैजोहरजगहतोफिर
अक़ीदत-केशबुतख़ानोंसेक्यूँँउलझें?
येमानाथीबड़ीकालीशब-ए-फ़ुर्क़त
सहरजबहोगईरातोंसेक्यूँँउलझें?
हवाएँजोगुलोंसेखेलतीथींकल
मिरेमहबूबकीज़ुल्फ़ोंसेक्यूँँउलझें?
इसीकारननहींरोयातिरेआगे
मिरेआँसूतिरीपलकोंसेक्यूँँउलझें?
नदीयेसोचकरचुप-चापबहतीहै
सदाएँउसकीवीरानोंसेक्यूँँउलझें?
उन्हेंक्यावास्ता'आलोक'-जीग़मसे
गुलोंकेआश्नाख़ारोंसेक्यूँँउलझें?
  - Alok Yadav
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