khula hai zeest ka ik khushnuma varq phir se | खुला है ज़ीस्त का इक ख़ुशनुमा वरक़ फिर से

  - Alok Yadav
खुलाहैज़ीस्तकाइकख़ुशनुमावरक़फिरसे
हवा-ए-शौक़नेकीहैयहाँपेदक़फिरसे
पुकारताहैमुझेकौनमेरेमाज़ीसे
किआजरुख़पेमिरेछागईशफ़क़फिरसे
ख़फ़ाख़फ़ासेहैंआख़िरजनाब-ए-नासेहक्यूँँ
किसीनेकरदियाक्याआजज़िक्र-ए-हक़फिरसे
किसीसेरूठगएयाकिसीकादिलतोड़ा
जबींपेगयाक्यूँँआपकीअरक़फिरसे
मियान-ए-दिलकोईलेतीहैटीसअंगड़ाई
वहीहैरंजवहीग़मवहीक़लक़फिरसे
निकलोचाँदनीरातोंमेंकितनीबारकहा
हुआहैचाँदकेचेहरेकारंगफ़क़फिरसे
बसएकतजरबाकाफ़ीहैज़िंदगीकेलिए
पढ़ाजाएगाहमसेवहीसबक़फिरसे
यहीनिज़ाम-ए-ज़मानायहीतग़य्युरहै
जोसहलहैवहीहोजाएगाअदक़फिरसे
कहींक़रीबहीबादलबरसतेहैं'आलोक'
हवाएँलाईहैंख़ुनकीकीकुछरमक़फिरसे
  - Alok Yadav
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