har shay musaafir har cheez raahi | हर शय मुसाफ़िर हर चीज़ राही

  - Allama Iqbal
हरशयमुसाफ़िरहरचीज़राही
क्याचाँदतारेक्यामुर्ग़माही
तूमर्द-ए-मैदाँतूमीर-ए-लश्कर
नूरीहुज़ूरीतेरेसिपाही
कुछक़द्रअपनीतूनेजानी
येबे-सवादीयेकम-निगाही
दुनिया-ए-दूँकीकबतकग़ुलामी
याराहेबीकरयापादशाही
पीर-ए-हरमकोदेखाहैमैंने
किरदार-ए-बे-सोज़गुफ़्तारवाही
  - Allama Iqbal
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