khu | ख़ुदी वो बहर है जिस का कोई किनारा नहीं

  - Allama Iqbal
ख़ुदीवोबहरहैजिसकाकोईकिनारानहीं
तूआबजूइसेसमझाअगरतोचारानहीं
तिलिस्म-ए-गुंबद-ए-गर्दूंकोतोड़सकतेहैं
ज़ुजाजकीयेइमारतहैसंग-ए-ख़ारानहीं
ख़ुदीमेंडूबतेहैंफिरउभरभीआतेहैं
मगरयेहौसला-ए-मर्द-ए-हेच-कारानहीं
तिरेमक़ामकोअंजुम-शनासक्याजाने
किख़ाक-ए-ज़ि़ंदाहैतूताबा-ए-सितारानहीं
यहींबहिश्तभीहैहूरजिबरईलभीहै
तिरीनिगहमेंअभीशोख़ी-ए-नज़ारानहीं
मिरेजुनूँनेज़मानेकोख़ूबपहचाना
वोपैरहनमुझेबख़्शाकिपारापारानहीं
ग़ज़बहैऐन-ए-करममेंबख़ीलहैफ़ितरत
किलाल-ए-नाबमेंआतिशतोहैशरारानहीं
  - Allama Iqbal
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