phir charaagh-e-laala se raushan hue koh o daman | फिर चराग़-ए-लाला से रौशन हुए कोह ओ दमन

  - Allama Iqbal
फिरचराग़-ए-लालासेरौशनहुएकोहदमन
मुझकोफिरनग़्मोंपेउकसानेलगामुर्ग़-ए-चमन
फूलहैंसहरामेंयापरियाँक़तारअंदरक़तार
ऊदेऊदेनीलेनीलेपीलेपीलेपैरहन
बर्ग-ए-गुलपररखगईशबनमकामोतीबाद-ए-सुब्ह
औरचमकातीहैउसमोतीकोसूरजकीकिरन
हुस्न-ए-बे-परवाकोअपनीबे-नक़ाबीकेलिए
होंअगरशहरोंसेबनप्यारेतोशहरअच्छेकिबन
अपनेमनमेंडूबकरपाजासुराग़-ए-ज़ि़ंदगी
तूअगरमेरानहींबनताबनअपनातोबन
मनकीदुनियामनकीदुनियासोज़मस्तीजज़्बशौक़
तनकीदुनियातनकीदुनियासूदसौदामक्रफ़न
मनकीदौलतहाथआतीहैतोफिरजातीनहीं
तनकीदौलतछाँवहैआताहैधनजाताहैधन
मनकीदुनियामेंपायामैंनेअफ़रंगीकाराज
मनकीदुनियामेंदेखेमैंनेशैख़बरहमन
पानीपानीकरगईमुजकोक़लंदरकीयेबात
तूझुकाजबग़ैरकेआगेमनतेरातन
  - Allama Iqbal
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