fitrat ko khird ke roo-b-roo kar | फ़ितरत को ख़िरद के रू-ब-रू कर

  - Allama Iqbal
फ़ितरतकोख़िरदकेरू-ब-रूकर
तस्ख़ीर-ए-मक़ाम-ए-रंग-ओ-बूकर
तूअपनीख़ुदीकोखोचुकाहै
खोईहुईशयकीजुस्तुजूकर
तारोंकीफ़ज़ाहैबे-कराना
तूभीयेमक़ाम-ए-आरज़ूकर
उर्यांहैंतिरेचमनकीहूरें
चाक-ए-गुल-ओ-लालाकोरफ़ूकर
बे-ज़ौक़नहींअगरचेफ़ितरत
जोउससेहोसकावोतूकर
  - Allama Iqbal
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