ejaz hai kisi ka ya gardish-e-zamaana | एजाज़ है किसी का या गर्दिश-ए-ज़माना

  - Allama Iqbal
एजाज़हैकिसीकायागर्दिश-ए-ज़माना
टूटाहैएशियामेंसेहर-ए-फ़िरंगियाना
तामीर-ए-आशियाँसेमैंनेयेराज़पाया
अह्ल-ए-नवाकेहक़मेंबिजलीहैआशियाना
येबंदगीख़ुदाईवोबंदगीगदाई
याबंदा-ए-ख़ुदाबनयाबंदा-ए-ज़माना
ग़ाफ़िलहोख़ुदीसेकरअपनीपासबानी
शायदकिसीहरमकातूभीहैआस्ताना
लाइलाहकेवारिसबाक़ीनहींहैतुझमें
गुफ़्तार-ए-दिलबरानाकिरदार-ए-क़ाहिराना
तेरीनिगाहसेदिलसीनोंमेंकाँपतेथे
खोयागयाहैतेराजज़्ब-ए-क़लंदराना
राज़-ए-हरमसेशायद'इक़बाल'बा-ख़बरहै
हैंइसकीगुफ़्तुगूकेअंदाज़महरमाना
  - Allama Iqbal
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