anokhi waz'a hai saare zamaane se niraale hain | अनोखी वज़्अ है सारे ज़माने से निराले हैं

  - Allama Iqbal
अनोखीवज़्अहैसारेज़मानेसेनिरालेहैं
ये'आशिक़कौनसीबस्तीकेया-रबरहनेवालेहैं
इलाज-ए-दर्दमेंभीदर्दकीलज़्ज़तपेमरताहूँ
जोथेछालोंमेंकाँटेनोक-ए-सोज़नसेनिकालेहैं
फला-फूलारहेया-रबचमनमेरीउमीदोंका
जिगरकाख़ूनदेदेकरयेबूटेमैंनेपालेहैं
रुलातीहैमुझेरातोंकोख़ामोशीसितारोंकी
निरालाइश्क़हैमेरानिरालेमेरेनालेहैं
पूछोमुझसेलज़्ज़तख़ानमाँ-बर्बादरहनेकी
नशेमनसैकड़ोंमैंनेबनाकरफूँकडालेहैं
नहींबेगानगीअच्छीरफ़ीक़-ए-राह-ए-मंज़िलसे
ठहरजाशररहमभीतोआख़िरमिटनेवालेहैं
उमीद-ए-हूरनेसबकुछसिखारक्खाहैवाइज़को
येहज़रतदेखनेमेंसीधे-साधेभोलेभालेहैं
मिरेअश'आर'इक़बाल'क्यूँँप्यारेहोंमुझको
मिरेटूटेहुएदिलकेयेदर्द-अंगेज़नालेहैं
  - Allama Iqbal
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