mirii navaa-e-shauq se shor hareem-e-zaat men | मेरी नवा-ए-शौक़ से शोर हरीम-ए-ज़ात में

  - Allama Iqbal
मेरीनवा-ए-शौक़सेशोरहरीम-ए-ज़ातमें
ग़ुल्ग़ुला-हा-ए-अल-अमाँबुत-कदा-ए-सिफ़ातमें
हूरफ़रिश्ताहैंअसीरमेरेतख़य्युलातमें
मेरीनिगाहसेख़ललतेरीतजल्लियातमें
गरचेहैमेरीजुस्तुजूदैरहरमकीनक़्शा-बंद
मेरीफ़ुग़ाँसेरुस्तख़ेज़काबासोमनातमें
गाहमिरीनिगाह-ए-तेज़चीरगईदिल-ए-वजूद
गाहउलझकेरहगईमेरेतवहहुमातमें
तूनेयेक्याग़ज़बकियामुझकोभीफ़ाशकरदिया
मैंहीतोएकराज़थासीना-ए-काएनातमें
  - Allama Iqbal
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