kya ye maqtool ki aulaad ki tauheen nahin | क्या ये मक़्तूल की औलाद की तौहीन नहीं

  - Ali Shiran
क्यायेमक़्तूलकीऔलादकीतौहीननहीं
एकभीशख़्सभरेशहरमेंग़मगीननहीं
दोस्तीवज्ह-ए-अज़िय्यतभीहुआकरतीहै
जैसेमैंतेरेलिएबाइ'स-ए-तस्कीननहीं
मैंनेदिन-रातकोहररंगमेंढलतेदेखा
कोईरुख़वक़्तकीतस्वीरकारंगीननहीं
अजनबीसोचकेआनामिरीमिट्टीकीतरफ़
कुर्रा-ए-अर्ज़काहरमुल्कफ़िलिस्तीननहीं
रोज़लगतेहैंभलेमुझकोहज़ारोंचेहरे
दिलकीतकलीफ़काबाइ'सेकोईदोतीननहीं
कुछतग़य्युरमेंअगरहैतोदिखाआँखोंको
ज़िंदगीमैंतिरेदिन-रातकाशौक़ीननहीं
  - Ali Shiran
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