aatish-e-zakhm se jab seena pighlata tha mira | आतिश-ए-ज़ख़्म से जब सीना पिघलता था मिरा

  - Ali Shiran
आतिश-ए-ज़ख़्मसेजबसीनापिघलताथामिरा
मुँहसेआवाज़नहींख़ूननिकलताथामिरा
सुर्ख़अंगारेदहकतेथेमिरीआँखोंमें
तेरीतौहीनपेजबरंगबदलताथामिरा
इतनीमानूसथीएहसासकीलौधूपकेसाथ
जिस्मसूरजकेउतरजानेसेजलताथामिरा
कमथीमौतकीरफ़्तारसेरफ़्तार-ए-सफ़र
साँसरुकजातेथेजबक़ाफ़िलाचलताथामिरा
ग़ैरआबादमसाफ़तमेंग़नीमतथीज़मीं
कारवाँगर्दकीख़ूराकपेपलताथामिरा
दौड़तेदौड़तेमैदानमेंप्यासोंकेलिए
पाँवकेतलवोंसेएहसासनिकलताथामिरा
हब्सअंदरकीनिकलतीतोहवारुकजाती
साँसमुश्किलसेयेमाहौलनिगलताथामिरा
वहशतीराहगुज़रतयहुईमुझसे'अली'
जिस्मतोजिस्महैसायाभीदहलताथामिरा
  - Ali Shiran
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy