sham'a ka may ka shafaq-zaar ka gulzaar ka rang | शम्अ' का मय का शफ़क़-ज़ार का गुलज़ार का रंग

  - Ali Sardar Jafri
शम्अ'कामयकाशफ़क़-ज़ारकागुलज़ारकारंग
सबहैंऔरसबसेजुदाहैलब-ए-दीदारकारंग
अक्स-ए-साक़ीसेचमकउट्ठीहैसाग़रकीजबीं
औरकुछतेज़हुआबादा-ए-गुलनारकारंग
शैख़मेंहिम्मत-ए-रिन्दान-ए-क़दह-ख़्वारकहाँ
एकहीजाममेंआशुफ़्ताहैदस्तारकारंग
उनकेआनेकोछुपाऊँतोछुपाऊँक्यूँँकर
बदलाबदलासाहैमेरेदर-ओ-दीवारकारंग
शफ़क़-ए-सुब्ह-ए-शहादतसेहैताबिंदाजबीं
वर्नाआलूदा-ए-ख़ूँथाउफ़ुक़-ए-दारकारंग
आफ़्ताबोंकीतरहजागीहैइंसानकीजोत
जगमगाताहैसिरापर्दा-ए-असरारकारंग
वक़्तकीरूहमुनव्वरहैनवासेमेरी
अस्र-ए-नौमेंहैमिरीशोख़ी-ए-अफ़्कारकारंग
  - Ali Sardar Jafri
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