baithe hain jahaan saaqi paimana-e-zar le karus bazm se uth aa.e ham deeda-e-tar le kar | बैठे हैं जहाँ साक़ी पैमाना-ए-ज़र ले कर

  - Ali Sardar Jafri
बैठेहैंजहाँसाक़ीपैमाना-ए-ज़रलेकर
उसबज़्मसेउठआएहमदीदा-ए-तरलेकर
यादोंसेतिरीरौशनमेहराब-ए-शब-ए-हिज्राँ
ढूँढेंगेतुझेकबतकक़िंदील-ए-क़मरलेकर
क्याहुस्नहैदुनियामेंक्यालुत्फ़हैजीनेमें
देखेतोकोईमेराअंदाज़-ए-नज़रलेकर
होतीहैज़मानेमेंकिसतरहपज़ीराई
निकलोतोज़राघरसेइकज़ौक़-ए-सफ़रलेकर
राहेंचमकउट्ठेंगीख़ुर्शीदकीमशअ'लसे
हमराहसबाहोगीख़ुश्बू-ए-सहरलेकर
मख़मलसीबिछादेंगेक़दमोंकेतलेसाहिल
दरियाउबलआएँगेसद-मौज-ए-गुहरलेकर
पहनाएँगेताजअपनापेड़ोंकेघनेसाए
निकलेंगेशजरअपनेख़ुश-रंगसमरलेकर
लपकेंगेगलेमिलनेसर्वऔरसनोबरसब
उठेंगेगुलिस्ताँभीशाख़-ए-गुल-ए-तरलेकर
हँसतेहुएशहरोंकीआवाज़बुलाएगी
लबजामकेचमकेंगेसौशो'ला-ए-तरलेकर
अफ़्लाकबजाएँगेसाज़अपनेसितारोंका
गाएँगेबहुतलम्हेअन्फ़ास-ए-शररलेकर
येआलम-ए-ख़ाकीइकसय्यारा-ए-रौशनहै
अफ़्लाकसेटकरादोतक़दीर-ए-बशरलेकर
  - Ali Sardar Jafri
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