shabon ki zulf ki roo-e-sehar ki KHair manao | शबों की ज़ुल्फ़ की रू-ए-सहर की ख़ैर मनाओ

  - Ali Sardar Jafri
शबोंकीज़ुल्फ़कीरू-ए-सहरकीख़ैरमनाओ
निगार-ए-शम्सउरूस-ए-क़मरकीख़ैरमनाओ
सिपाह-ए-दुश्मन-ए-इंसानियतक़रीबआई
दयार-ए-हुस्नसर-ए-रहगुज़रकीख़ैरमनाओ
अभीतोऔरोंकेदीवार-ओ-दरपेयूरिशथी
अबअपनेसाया-ए-दीवार-ओ-दरकीख़ैरमनाओ
चलीहैआतिश-ओ-आहनकेदिलसेबाद-ए-सुमूम
चमनकेजल्वा-ए-गुलहा-ए-तरकीख़ैरमनाओ
गुज़रजाएकहींबहर-ओ-बरसेख़ूनकीधार
फ़रोग़-ए-शबनम-ओ-आब-ओ-गुहरकीख़ैरमनाओ
येनफ़अ'-ख़ोरोंकीदानिश-फ़रोशदुनियाहै
मता-ए-इल्मकीजिंस-ए-हुनरकीख़ैरमनाओ
मिरेलिएहैमिरीमुफ़लिसी-व-नापाकी
तुमअपनीपाकी-ए-क़ल्ब-ओ-नज़रकीख़ैरमनाओ
  - Ali Sardar Jafri
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