mirii imlaak samajh be-sar-o-saamaani ko | मेरी इम्लाक समझ बे-सर-ओ-सामानी को

  - Ali Muzammil
मेरीइम्लाकसमझबे-सर-ओ-सामानीको
एकमुद्दतसेमैंलाहक़हूँपरेशानीको
अबयेमा'मूलकेग़ममुझकोरुलानेसेरहे
सानेहेचाहिएँअश्कोंकीफ़रावानीको
लौटआएगीजोअफ़्लाकसेफ़रियादमिरी
कौनबख़्शेगासनदमेरीसना-ख़्वानीको
पेश-ए-मंज़रभीवहीथाजोपस-ए-ज़ातरहा
ग़मकीमीरासमिलीआँखकीहैरानीको
सीनासद-चाककरोदिलसेअग़राज़करो
क़ैदरहनेदोअभीदश्तमेंज़िंदानीको
मौतभीदेखकेअंगुश्त-ब-दंदाँहै'अली'
मरक़द-ए-ज़ीस्तसेलिपटीहुईवीरानीको
  - Ali Muzammil
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy