main lauh-e-arz par naazil hua sahifa hooñ | मैं लौह-ए-अर्ज़ पर नाज़िल हुआ सहीफ़ा हूँ

  - Ali Akbar Abbas
मैंलौह-ए-अर्ज़परनाज़िलहुआसहीफ़ाहूँ
दिलोंपेसब्तहूँपेशानियोंपेलिक्खाहूँ
पुरानीरुतमिरामुज़्दासुनाकेजातीहै
नईरुतोंकेजिलौमेंसदाउतरताहूँ
मैंकौनहूँमुझेसबपूछनेसेडरतेहैं
मैंरोज़एकनएकर्बसेगुज़रताहूँ
मैंएकज़िंदाहक़ीक़तहूँकौनझुटलाए
जोहोंटबंदरहेंआँखसेछलकताहूँ
खुलीहवामेंजोआऊँतोराखबनजाऊँ
अभीमैंज़ेर-ए-ज़मींहूँमगरउबलताहूँ
किसीतरहतोसवेरोंकीआँखखुलजाए
मैंशहरशहरमेंसूरजउठाएचलताहूँ
  - Ali Akbar Abbas
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