bikhar rahi hai jo quwwat vo phir munazzam ho | बिखर रही है जो क़ुव्वत वो फिर मुनज़्ज़म हो

  - Ali Akbar Abbas
बिखररहीहैजोक़ुव्वतवोफिरमुनज़्ज़महो
शिकस्तहोतोज़रूरीनहींकिमातमहो
सितारेसम्त-नुमाहैंतोइक्तिफ़ाकैसी
ज़मीनपरभीकहींजुगनुओंकापरचमहो
वोवक़्तपेटपेपत्थरहीबाँधनेकाहै
किजबज़मीनपेहीख़ंदक़ोंकामौसमहो
वहीतोवक़्तमुनासिबहैमो'जिज़ेकेलिए
कुछऔरआतिश-ए-क़हत-ओ-मुहालबरहमहो
तलाशकरतेहुएआएँगेहरारत-ओ-नूर
अभीशो'ला-ए-बा'स-ए-नवाज़मद्धमहो
  - Ali Akbar Abbas
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