shareek-e-haal-e-dil-e-be-qaraar aaj bhi hai | शरीक-ए-हाल-ए-दिल-ए-बे-क़रार आज भी है

  - Aleem Akhtar
शरीक-ए-हाल-ए-दिल-ए-बे-क़रारआजभीहै
किसीकीयादमिरीग़म-गुसारआजभीहै
मुझेतोकलभीथाउनपरइख़्तियारकोई
औरउनकोमुझपेवहीइख़्तियारआजभीहै
तिरीतरफ़सेज़ुहूर-ए-करमनहींसही
तिरेकरमकामुझेए'तिबारआजभीहै
वोरस्म-ए-शौक़कहाँअबमगरयेआलमहै
किजैसेदिलकोतिराइंतिज़ारआजभीहै
किसीकानक़्श-ए-कफ़-ए-पातोअबकहाँलेकिन
निशान-ए-सज्दासर-ए-रहगुज़ारआजभीहै
वोउनकाग़मकिनिगाहेंबदलचुका'अख़्तर'
कमाल-ए-शौक़कापरवरदिगारआजभीहै
  - Aleem Akhtar
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