ye baat vaqt se pahle kahaan samjhte hain | ये बात वक़्त से पहले कहाँ समझते हैं

  - Alam Khursheed
येबातवक़्तसेपहलेकहाँसमझतेहैं
हमइकसराएकोअपनामकाँसमझतेहैं
यक़ींकिसीकोनहींअपनीबे-सबातीका
सबअपनेआपकोशाह-ए-ज़माँसमझतेहैं
बसइकउड़ानभरीहैअभीख़लाओंतक
इसीकोअहल-ए-ज़मींआसमाँसमझतेहैं
हमेंभीखींचतीहैइसकीहरकशिशलेकिन
येख़ाक-दाँहैइसेख़ाक-दाँसमझतेहैं
येलोगइतनेफ़सुर्दाइसीलिएतोनहीं
किदूसरोंकोबहुतशादमाँसमझतेहैं
ख़ुदाउन्हेंभीहोतौफ़ीक़इसइबादतकी
मोहब्बतोंकोजोकार-ए-ज़ियाँसमझतेहैं
  - Alam Khursheed
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