kahii pe jism kahii par khayal rehta hai | कहीं पे जिस्म कहीं पर ख़याल रहता है

  - Alam Khursheed
कहींपेजिस्मकहींपरख़यालरहताहै
मोहब्बतोंमेंकहाँए'तिदालरहताहै
फ़लकपेचाँदनिकलताहैऔरदरियामें
बलाकाशोरग़ज़बकाउबालरहताहै
दयार-ए-दिलमेंभीआबादहैकोईसहरा
यहाँभीवज्दमेंरक़्साँग़ज़ालरहताहै
छुपाहैकोईफ़ुसूँ-गरसराबआँखोंमें
कहींभीजाओउसीकाजमालरहताहै
तमामहोतानहींइश्क़-ए-ना-तमामकभी
कोईभीउम्रहोयेला-ज़वालरहताहै
विसाल-ए-जिस्मकीसूरतनिकलतोआतीहै
दिलोंमेंहिज्रकामौसमबहालरहताहै
ख़ुशीकेलाखवसाएलख़रीदलो'आलम'
दिल-ए-शिकस्तामगरपुर-मलालरहताहै
  - Alam Khursheed
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