siyaah raat ke badan pe daagh ban ke rah ga.e | सियाह रात के बदन पे दाग़ बन के रह गए

  - Alam Khursheed
सियाहरातकेबदनपेदाग़बनकेरहगए
हमआफ़्ताबथेमगरचराग़बनकेरहगए
किसीकोइश्क़मेंभीअबजुनूँसेवास्तानहीं
येक्याहुआकिसारेदिलदिमाग़बनकेरहगए
वोशाख़शाख़नीलेपीलेलालरंगक्याहुए
तमामदश्तकेपरिंदज़ाग़बनकेरहगए
जिन्हेंयेज़ो'मथाज़मींसेतिश्नगीमिटाएँगे
अजबहुआवहीतही-अयाग़बनकेरहगए
मिलेगासबकोअपनाहक़रहेंगेसबसुकूनसे
मगरवोसारेवा'देसब्ज़बाग़बनकेरहगए
उजाड़तेहैंरोज़हमबसी-बसाईबस्तियाँ
ख़ुशावोलोगजोमकीन-ए-राग़बनकेरहगए
  - Alam Khursheed
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