jab tak khulii nahin thii asraar lag rahi thii | जब तक खुली नहीं थी असरार लग रही थी

  - Alam Khursheed
जबतकखुलीनहींथीअसरारलगरहीथी
येज़िंदगीमुझेभीदुश्वारलगरहीथी
मुझपरझुकीहुईथीफूलोंकीएकडाली
लेकिनवोमेरेसरपरतलवारलगरहीथी
छूतेहीजानेकैसेक़दमोंमेंगिरीवो
जोफ़ासलेसेऊँचीदीवारलगरहीथी
शहरोंमेंकेकैसेआहिस्ता-रौहुआमैं
सहरामेंतेज़अपनीरफ़्तारलगरहीथी
लहरोंकेजागनेपरकुछभीकामआई
क्याचीज़थीजोमुझकोपतवारलगरहीथी
अबकितनीकार-आमदजंगलमेंलगरहीहै
वोरौशनीजोघरमेंबेकारलगरहीथी
टूटाहुआहैशायदवोभीहमारेजैसा
आवाज़उसकीजैसेझंकारलगरहीथी
'आलम'ग़ज़लमेंढलकरक्याख़ूबलगरहीहै
जोटीसमेरेदिलकाआज़ारलगरहीथी
  - Alam Khursheed
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