tire khayal ko zanjeer karta rehta hooñ | तिरे ख़याल को ज़ंजीर करता रहता हूँ

  - Alam Khursheed
तिरेख़यालकोज़ंजीरकरतारहताहूँ
मैंअपनेख़्वाबकीता'बीरकरतारहताहूँ
तमामरंगअधूरेलगेतिरेआगे
सोतुझकोलफ़्ज़मेंतस्वीरकरतारहताहूँ
जोबातदिलसेज़बाँतकसफ़रनहींकरती
उसीकोशे'रमेंतहरीरकरतारहताहूँ
दुखोंकोअपनेछुपाताहूँमैंदफ़ीनोंसा
मगरख़ुशीकोहमा-गीरकरतारहताहूँ
गुज़िश्तारुतकाअमींहूँनएमकानमेंभी
पुरानीईंटसेता'मीरकरतारहताहूँ
मुझेभीशौक़हैदुनियाकोज़ेरकरनेका
मैंअपनेआपकोतस्ख़ीरकरतारहताहूँ
ज़मीनहैकिबदलतीनहींकभीमेहवर
मैंकैसीकैसीतदाबीरकरतारहताहूँ
जोमैंहूँउसकोछुपाताहूँसारेआलमसे
जोमैंनहींहूँवोतश्हीरकरतारहताहूँ
  - Alam Khursheed
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