zindagi men gham hi gham hain aur tu hai | ज़िंदगी में ग़म ही ग़म हैं और तू है

  - Alakh Niranjan
ज़िंदगीमेंग़महीग़महैंऔरतूहै
मरहलेकुछदम-ब-दमहैंऔरतूहै
बाग़मेंजबफूलहैंकाँटेंभीहोंगे
ज़िंदगीमेंजैसेहमहैंऔरतूहै
आसमाँमेंजितनेहैंयेचाँदतारेइश्क़मेंउतनेसितमहैंऔरतूहै
ख़ुदाअपनाठिकानाचलबतादे
सामनेदैर-ओ-हरमहैंऔरतूहै
येकहानीक्यूँउलझतीजारहीहै
हैभीक्याइसमेंकिहमहैंऔरतूहै
मेहरबाँहोंगेअलखअशआ'रमेरे
सबतिरेरहम-ओ-करमहैंऔरतूहै
  - Alakh Niranjan
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