shokh patte lahlahaate hain shajar ke | शोख़ पत्ते लहलहाते हैं शजर के

  - Alakh Niranjan
शोख़पत्तेलहलहातेहैंशजरके
जैसेकोईइश्तिहारअपनेहुनरके
कितनेकच्चेरास्तेहैंइसशहरमें
शे'रजैसेबनपड़ेहोंबे-बहरके
सौमकानेंफिरकहींतोड़ीगईंतो
एकपुतलाफिरकहींआयाउभरके
जबकरेंगेगुफ़्तुगूतन्हाइयोंसे
तबबनेंगेहम-सफ़रख़ुदहम-सफ़रके
पासबैठोभीकभीकाजललगाए
हौसलेभीदेखलोमेरीनज़रके
मुफ़्लिसीसेदूरथोड़ीहैअमीरी
फ़ासलेहैंचंदक़िस्मत-ओ-सफ़रके
गिरपड़ींतबडरगईंबूँदेंज़मींसे
हाथपकड़ेहीरहीबहतीनहरके
बाँटलेदुनियाजोटुकड़ेहोगएहैं
ज़ीस्त-ओ-हस्तीकेदिल-ओ-जान-ओ-जिगरके
यूँँक़लमकोकाग़ज़ोंमेंगाड़देना
क्यायहीआसारहैंतेरेग़दरके
अपनेअंधे-पनकेबारेमेंतोसोचो
ख़्वाब'अलख़'क्यूँदेखतेहोतुमसहरके
  - Alakh Niranjan
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy